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जयपुर: राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (RUHS) मेडिकल कॉलेज में स्टाफ की भारी कमी के चलते मरीजों को समय पर चिकित्सा सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। कॉलेज के प्रशासन और मरीजों के परिजनों का कहना है कि राज्य सरकार की ओर से इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जिससे स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है।
स्टाफ की भारी कमी
कॉलेज के सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में डॉक्टर, नर्स, और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के कई पद खाली पड़े हैं। कई विभागों में न्यूनतम आवश्यक स्टाफ भी उपलब्ध नहीं है, जिससे इलाज और संचालन में बाधाएं आ रही हैं।
मरीजों की परेशानियां बढ़ीं
स्टाफ की कमी के कारण OPD सेवाएं देरी से चल रही हैं, सर्जरी की तिथियां महीनों आगे खिसकाई जा रही हैं, और आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीज, जो निजी अस्पतालों का खर्च नहीं उठा सकते, सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
प्रशासन की अपील और सरकार की उदासीनता
RUHS प्रशासन ने कई बार राज्य सरकार को इस मुद्दे पर ज्ञापन सौंपा है। हालांकि, अब तक किसी ठोस कदम की घोषणा नहीं की गई है। सरकार की इस अनदेखी के चलते कॉलेज का अकादमिक और स्वास्थ्य सेवा दोनों स्तर पर प्रदर्शन गिर रहा है।
विशेषज्ञों की राय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही इस मुद्दे का समाधान नहीं किया गया, तो यह न केवल स्वास्थ्य सेवाओं पर, बल्कि मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता पर भी गहरा असर डालेगा।
मांगें और समाधान
RUHS प्रशासन और चिकित्सा कर्मचारियों ने सरकार से तुरंत खाली पदों को भरने, स्टाफ की संख्या बढ़ाने और संसाधनों में सुधार की मांग की है।
राज्य सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाकर मरीजों और मेडिकल कॉलेज को राहत प्रदान करनी चाहिए।
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