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इस्लामाबाद/ढाका से आ रही खबरें भारत के लिए चिंताजनक हो सकती हैं। 'साउथ एशिया-चाइना अलायंस' (साका) के नाम से चीन एक नया कूटनीतिक दांव चल रहा है। खबर है कि बीजिंग, पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ मिलकर SACA (दक्षिण एशियाई चाइना सहयोग संगठन) के समानांतर एक नया अलायंस बनाने की तैयारी में है। यह कदम चीन के 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' के विस्तार और दक्षिण एशिया में उसके बढ़ते प्रभाव का हिस्सा माना जा रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस प्रस्तावित 'साका अलायंस' में श्रीलंका, मालदीव और अफगानिस्तान को भी शामिल किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो यह दक्षिण एशिया में भू-राजनीतिक समीकरणों को बदल सकता है।
भारत के लिए इस अलायंस के मायने:
यह भारत के लिए एक जटिल स्थिति पैदा करता है, जिसके अपने फायदे और नुकसान हो सकते हैं।
भारत के लिए नुकसान (Cons for India):
क्षेत्रीय प्रभुत्व में कमी: चीन की अगुवाई में यह अलायंस भारत के पारंपरिक क्षेत्रीय प्रभुत्व को चुनौती दे सकता है।
रणनीतिक घेराबंदी: पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ चीन का गठबंधन भारत के लिए एक रणनीतिक घेराबंदी की स्थिति पैदा कर सकता है, खासकर हिंद महासागर क्षेत्र में।
SAARC की प्रासंगिकता पर सवाल: यदि SAARC के सदस्य देश इस नए अलायंस में शामिल होते हैं, तो यह पहले से ही निष्क्रिय पड़े SAARC की प्रासंगिकता पर और सवाल उठाएगा।
आर्थिक प्रतिस्पर्धा: चीन इन देशों के साथ अपने आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगा, जिससे भारत के लिए व्यापार और निवेश के अवसर कम हो सकते हैं।
सुरक्षा चुनौतियाँ: पाकिस्तान और चीन के बीच बढ़ती साझेदारी भारत के लिए पश्चिमी सीमा पर सुरक्षा चुनौतियों को बढ़ा सकती है।
भारत के लिए फायदे (Pros for India):
कूटनीतिक सक्रियता का अवसर: यह भारत को अपनी "पड़ोसी पहले" नीति को और मजबूत करने और अपने संबंधों को पुनर्गठित करने के लिए प्रेरित कर सकता है।
विकल्पों की खोज: भारत अन्य क्षेत्रीय और वैश्विक साझेदारों के साथ अपने संबंधों को और गहरा कर सकता है ताकि इस नए गठबंधन के प्रभाव को संतुलित किया जा सके।
लघु-सांपटी शक्ति का प्रदर्शन: भारत को अपने पड़ोसियों के साथ सांस्कृतिक, आर्थिक और तकनीकी संबंधों को मजबूत करने का अवसर मिल सकता है, जो चीन के प्रस्तावों के मुकाबले अधिक टिकाऊ हो सकते हैं।
आंतरिक विकास पर ध्यान: भारत को अपनी आंतरिक मजबूती और आर्थिक विकास पर अधिक ध्यान केंद्रित करने की प्रेरणा मिल सकती है, जिससे वह बाहरी दबावों का बेहतर ढंग से सामना कर सके।
सावधानी और निगरानी: यह भारत को चीन की बढ़ती क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं के प्रति अधिक सतर्क रहने और अपनी रक्षा एवं विदेश नीति को तदनुसार समायोजित करने का अवसर देगा।
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